Thursday, June 5, 2008

Kahani puri filmi hain.

न जाने कब दो कहानिया मिल कर एक कहानी बन जाती हैं! दो अलग अलग रहो के मुसाफिर मिल जाते हैं और चल पड़ते हैं एक ने अनजान रस्ते की और ! ऊपर वलाला भी न जाने क्या खेल हूँ इंसानों के साथ खेलता हैं की हमे ख़ुद पेर यकीं ही नही रहता की हूँ भी कुछ करते हैं। ऐसे ही एक कहानी मेरी जिंदगी की भी बन गई हैं। मैं अक्सर कहता हूँ की "ये कहानी पुरी फिल्मी हैं" । सच तो हैं।

मेरी कहानी अभी तक मेरी ही थी। लेकिन २२ मई को वो हमारी कहानी बन गई। जब एक जवान लड़का किसी कहानी को हमारी कहानी कहता हैं तो उसका मतलब एक लड़के और एक लड़की की कहानी से होता हैं।

तो मुझ से ही शुरू करते हैं। मई एक प्राइवेट कंपनी many काम करने वाला, बोहोत ज्यादा ना सही लेकिन ठीक ठाक कमाने वाला। जिंदगी का एक ही मकसद था की अपनी गर्ल फ्रिएंद से शादी करूँ मेक्सिको जा कर। हमारा प्यार ७-८ साल पुराना था। कभी एक दुसरे को आमने सामने नही देखा। हजारों मिल्स के दुरिन हम दोनों ने कभी परर नही की। लेकिन दिल एक दुसरे से कैसे जुड़ गया नही जानते थे हम।